What is Layer 2 and Layer 3 Switch | Difference between Layer 2 and Layer 3 Devices List

Layer 2 and Layer 3 Switch

बहुत सालो से Layer 2 switches, network को manage कर रहे है लेकिन अब जैसे जैसे network complexity increase हो रही है एवं network मे ज्यादा functions की demand आ रही है, Layer 3 switches का use enterprises मे तेजी से बढ़ रहा है | 

Layer 2 switching के लिए Switches and bridges use होते है | ये बड़े collision domain को break करके बहुत सारे छोटे छोटे block बना देते है | एक LAN मे सभी host devices एक central device से connected होती है | बहुत पहले ये सभी devices hub से connected होती थी लेकिन hub के disadvantages ने  इसको switch and bridge से replace कर दिया (जैसे hub से पास होने वाले traffic के बारे मे उनको पता नहीं होता था, एक बड़ा collision domain create कर देते थे आदि) |

सबसे पहले Hub को bridge से replace किया गया क्योकि hub की तुलना मे bridge multiple collision domains create कर देते थे लेकिन bridge का एक disadvantage था की इसमे number of ports कम होते थे इसलिए धीरे धीरे इनकी जगह पर switches का ज्यादा use होने लगा एवं आज भी switch सबसे popular layer 2 device है | Switches आने वाले traffic को inspect कर सकते है एवं उसके अनुसार उसको forward करने का decision ले सकते है | Switch की हर port एक separate **collision domain होता है |

**किसी नेटवर्क सेगमेंट मे Collision Domain वो portion or block होता है जहाँ पर collisions होता है | जब दो devices एक साथ Shared मीडिया की हेल्प से डाटा send करने की कोशिश करती है तो device पर Collision होता है |

Layer 2 and Layer 3 switches का difference जानने के लिए उनके functions को समझना जरुरी है | ये जानना जरुरी है की Layers क्या होती है and कैसे काम करती है | Layer 2 and Layer 3 के difference जाने से पहले थोड़ा बहुत OSI model को समझ लेते है क्योकि ये layers का concept OSI model से ही आया है –

layer 2 and layer 3 switch hindi

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OSI Layered Model – 

OSI की full form Open System Interconnection है | यह एक networking model है जो की network की 7 seven ‘layers’ से मिलकर बनता है इस model को इस तरह से define किया गया है जिसमे information एक layer से दूसरी layer मे पास होती है एवं information कैसे पास होगी और सभी layers के क्या क्या function होंगे यह सभी कुछ OSI model मे बताया गया है | यहाँ पर हम OSI layer की दो layer Layer 2 and Layer 3 की बात करंगे |

Layer 2 OSI की data link layer होती है जिसमे data packets bits मे encode एवं decoded होता है | Layer 2 मे network का कोई computer किस तरह से data का access gain करता है एवं किस तरह से data को transmit करने की permission देता है यह पूरा control MAC (Media Access Control) sub layer के पास होता है | LLC (Logical Link control) layer – फ्रेम सिंक्रोनाइजेशन, फ्लो कण्ट्रोल and error चेकिंग को control करती है |

Layer 3, Node to node data transmission मे logical path (जिसको virtual circuit कहते है) create करने के साथ साथ switching and routing technologies provide करती है | इस लेयर के main functions address रूटिंग एंड फॉरवार्डिंग, inter-नेटवर्किंग, error हैंडलिंग, congestion कण्ट्रोल and पैकेट sequencing आदि है |

अब जब OSI model की दो layers को समझ एवं जान लिया है तो आपको Layer 2 and Layer 3 Switch को समझना भी आसान हो जायेगा |

Layer 2 Switch : Layer 2 switch एक network switch or device है जो की OSI model की data link layer (Layer 2) पर काम करता है | Layer 2 का main function LAN मे traffic को एक device से दूसरी device तक पहुंचना है और switch इसको perform करने के लिए सभी devices के MAC address एवं wo MAC कौनसी physical port से related है dono information table mai अपने पास रहता है | जब network मे data frame को एक point से दूसरे point पर transfer किया जाता है तो यह frame के path को decide करने के लिए MAC Address ki table का use करता है |

Actually यह LAN मे data transmit करने के लिए hardware based switching method को use करता है | Layer 2 switch, data को physical layer मे transport करने के लिए responsible होने के साथ साथ हर transmit and receive होने वाले frame की error checking भी करता है | Data को network मे properly flow करने के लिए switch, network की सभी node के MAC address को use करता है |  MAC table की help से frame fast speed से network मे flow कर सकते है | लेकिन Layer 2 IP पर काम नहीं करता जैसे की Layer 3 switch कर सकता है |  जितना भी traffic, MAC address की बिच switch होता है वो केवल उस LAN मे ही रहता है जब आपको जरुरत होती है की Traffic LANs (VLAN) की बिच cross हो तो आपको Layer 3 device की जरुरत पड़ती है  |  Data Link layer की दो sub-layer होती है i –

  1. MAC sub-layer
  2. LLC sub-layer ( Logical Link Control)

Layer 2 switching hardware-based होती है इसका मतलब MAC address tables को create and maintain करने के लिए switches application-specific integrated circuit (ASICs) use करता है | Layer 2 switch को multi-port bridge भी कहते है |

Switch कैसे काम करता है : सबसे पहले जब switch किसी network मे नया होता है तो यह किसी भी devices के बारे मे नहीं जानता | जब भी कोई message किसी device को transfer करने के लिए switch के पास आता है तो ये उस packet को सभी ports or devices पर broadcast कर देता है | वो message जिस port या device के लिए होता है वो device उस packet को accept कर लेती है बाकी की devices packet को reject कर देती है | लेकिन इस process मे Switch की MAC table sender and receiver के MAC address से update हो जाती है | इस प्रकार switch, network की सभी devices का MAC address, table मे update कर लेता है | एक बार switch से connected सभी devices का MAC address switch मे update हो जाता है तो फिर next time कोई भी sender, packets भेजता है तो packet को broadcast करने की जरूरत नहीं होती and data transmission fast होता है |

Layer 2 के कुछ फायदे होते है जैसे की छोटे network मे केवल switching की जरुरत होती है तो वहां पर ये use किये जाते है क्योकि इनकी cost कम होती है and affordable होते है | इनकी latency बहुत low होती है लेकिन Layer 2 के कुछ नुक्सान भी है – जैसे की switch मे routing facility न होना | Layer 2 networks सभी तरह के traffic को forward करता है especially ARP and DHCP broadcasts | अगर एक device पर data transmit होता है तो इसको network की सभी devices पर forward कर दिया जाता है यह छोटे network मे तो ठीक है लेकिन अगर network बड़ा हो तो broadcast traffic congestion create कर सकता है जिसे network efficiency कम हो जाती है |

Layer 3 Device : – सबसे common Layer 3 device जो की network मे use होती है वो है router | Router इससे पास होने वाले traffic को देख कर (source and destination IP address) decide कर सकता है की उस traffic को कैसे पास करना है | क्योकि router multiple networks (LAN WAN VLAN) की information को hold करके रख सकता है इसलिए ही यह इन network मे traffic को pass कर सकता है | इसको routing कहते है | अब अगर hum Layer 3 switch की बात करते है तो इसकी functionally Layer 2 switch एवं Gateway Router के बिच exist करती है | 

जब आप layer 2 v Layer 3 device के बिच compare कर रहे है तो आपको ये देखना है की आपको क्या additional software functionality मिल रही है | Layer 3 device वो सभी काम कर सकता है जो की layer 2 मे किया जा सकता है लेकिन इसके साथ साथ layer 3 के additional function अच्छी तरह से perform कर सकता है | एक feature जो की सबसे पहले आप layer 3 device मे notice करेंगे वो है Static Routing | Static Routing, traffic को अलग अलग VLAN के बिच rout करना allow करता है | 

Layer 3 switch का next feature Dynamic Routing है | जो switch Dynamic Routing Protocols को support करते है वो सभी मायने मे layer 3 switch होते है | Dynamic Routing Protocols की help से बड़े network को आपस मे link किया जाता है and फिर वो आपस मे routing table share करते है | Routing traffic के आलावा Layer 3 switches बहुत सारे function perform कर सकता है लेकिन इसके लिए switch से पास होने वाले IP address की information को समझने की जरुरत होती है |

Layer 2 की तुलना मे Layer 3 switches मे ज्यादा power and security होती है | Layer 3 switch core network वाली LAN मे मिलते है जहाँ पर ज्यादा traffic load को manage करने के लिए ज्यादा power चाहिए होती है | इसके साथ साथ कुछ Layer 3 switches ज्यादा bandwidth support के लिए 10 Gigabit interfaces offer करते है | Layer 3 switches 802.1x ऑथेंटिकेशन, DoS प्रिवेंशन, लूपबाक डिटेक्शन और ARP इंस्पेक्शन जैसे सिक्योरिटी फीचर offer करते है |

Layer 3 की जरुरत कहाँ होती है :

Layer 3 switches की बहुत जगह जरुरत होती है | सबसे पहले इन devices को data centers एवं large campus network environments मे जरूरत होती है जहां पर network or applications को layer 3 के features use करते है |

Layer 3 switches का बड़े network मे use करने का फायदा ये है की ये router का load कम कर देता है जिससे की router की performance better हो सकती है | जहाँ पर एक router and एक layer 3 switch setup किया जाता है वहां पर Layer 3 switch को सभी inter-VLAN routing को handle करने के लिए configure किया जा सकता है | इस प्रकर router का burden कम करने से इसके resources को LAN to WAN traffic and Firewall rules को handle करने के लिए dedicate किया जा सकता है |

7 Comments

  1. swapnil June 9, 2017
    • Amit Saxena June 9, 2017
  2. ram July 4, 2017
    • Amit Saxena July 4, 2017
  3. kamal September 5, 2017
    • Amit Saxena September 5, 2017
  4. Arjun January 25, 2018

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